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‘बोफोर्स तोप सही थी, सौदे में गड़बड़ी थी’, कसौली लिटफेस्ट में पूर्व सैन्य अधिकारी का बड़ा बयान

कसौली 

खुशवंत सिंह लिटफेस्ट के अंतिम दिन ऑपरेशन ब्लू स्टार पर चर्चा हुई। अंतिम दिन के पहले सत्र में पूर्व सैन्य अधिकारी और लेखक प्रोबल दासगुप्ता ने अपनी किताब जनरल सुंदरजी : सेलिब्रेटेड एंड डिबेटेड पर लेखक सुनेत्रा चौधरी के साथ चर्चा करते हुए कहा कि ऑपरेशन ब्लू स्टार  ऐसी घटना थी, जिसने अंततः सैन्य हस्तक्षेप को अनिवार्य बना दिया।

 उन्होंने कहा कि 1970 के दशक के मध्य में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, ज्ञानी जैल सिंह और संजय गांधी पंजाब में एक नए नेता को उभारने का प्रयास कर रहे थे। दासगुप्ता के अनुसार इसी प्रयास के तहत मोगा में जरनैल सिंह भिंडरांवाले नामक एक युवा धार्मिक नेता को आगे बढ़ाया गया। वह बड़ी भीड़ जुटाने और प्रभावशाली भाषण देने में सक्षम था।  उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने भिंडरांवाले को बढ़ावा दिया, लेकिन वह ऐसे बदल गया, जिसकी उन्होंने कल्पना नहीं की थी। यह स्थिति सैन्य विफलता से अधिक राजनीतिक विफलता थी। भिंडरांवाले ने स्वर्ण मंदिर परिसर में शरण लेने से पहले विभिन्न गुरुद्वारों पर कब्जा कर लिया था। 

सरकार के लिए उसे वहां से हटाना या उसके प्रभाव को समाप्त करना मुश्किल साबित हो रहा था। 1983 को इतिहास का एक महत्वपूर्ण मोड़ बताते हुए उन्होंने कहा कि इसी वर्ष पंजाब पुलिस के उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) अवतार सिंह अटवाल की स्वर्ण मंदिर की सीढ़ियों पर  गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उनका शव करीब छह घंटे तक वहीं पड़ा रहा और उसे वहां से हटाया नहीं जा सका।

दासगुप्ता ने कहा कि ऑपरेशन का नेतृत्व करने वाले जनरल कुलदीप सिंह बरार ने बताया था कि उन्हें खुफिया जानकारी मिली थी कि 9 जून को भिंडरांवाले के समर्थक खालिस्तान की घोषणा कर सकते हैं। उन्हें आशंका थी कि घेराबंदी किए जाने की स्थिति में भिंडरांवाले के समर्थक अमृतसर की ओर कूच कर सकते हैं, जिससे हालात को संभालना बेहद मुश्किल हो जाता। 

बोफोर्स तोप अच्छी थी, लेकिन सौदे पर सवाल दासगुप्ता ने बोफोर्स तोप सौदे का जिक्र करते हुए कहा कि तोप की गुणवत्ता और उसे खरीदने के सौदे को अलग-अलग देखना चाहिए। उनके अनुसार, जनरल सुंदरजी ने तोप खरीदने का समर्थन किया था। इस संदर्भ में उनका आकलन था कि तोप अच्छी थी, लेकिन सौदे की प्रक्रिया में गड़बड़ी थी। चर्चा में कथित कमीशन और जवाबदेही के मुद्दे भी उठे।

सैन्य तैनाती का उद्देश्य पाकिस्तान की सैन्य क्षमता को परखना ऑपरेशन ब्रासटैक्स पर उन्होंने बताया कि बड़े स्तर पर सैन्य तैनाती का उद्देश्य पाकिस्तान की सैन्य क्षमता को परखना था, लेकिन इससे दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया। उन्होंने उस दौर में पाकिस्तान के परमाणु प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई का अवसर गंवाने की बात भी कही।

पिता की हत्या के बाद संभाली लैब, बनाया बड़ा कारोबार महोत्सव में पद्मश्री सम्मानित डॉ. अरविंद लाल ने अपनी जिंदगी के उस दौर के बारे में बताया, जब एक पारिवारिक त्रासदी ने उनका भविष्य बदल दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1977 में पिता की हत्या के बाद उन्हें अपनी पढ़ाई छोड़कर परिवार का कारोबार संभालने के लिए दिल्ली लौटना पड़ा।

जनरल सुंदरजी ने दरकिनार किया प्रोटोकाल
जनरल सुंदरजी: सेलिब्रेटेड और डिबेटेड विषय में जनरल ब्रासस्टैक्स: द सुंदरजी स्टोरी किताब पर चर्चा करते हुए प्रोबल दासगुप्ता ने कहा कि पश्चिमी कमान के प्रमुख के रूप में सुंदरजी ने प्रोटोकाल को दरकिनार कर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से बात की। उस समय के डिवीजन कमांडर मेजर जनरल बराड़ ने स्वर्ण मंदिर की घेराबंदी करने का सुझाव दिया था, लेकिन सुंदरजी की सोच कुछ और ही था।

ना प्रमुख को भी नजरअंदाज कर दिया
उन्होंने तत्कालीन सेना प्रमुख को भी नजरअंदाज कर दिया और अपनी योजना पर आगे बढ़े। अंततः सेना ने स्वर्ण मंदिर परिसर पर हमला कर दिया, जिसके बेहद दुखद परिणाम निकले। सुरक्षा बल, नौकरशाही व राजनीतिक वर्ग के बीच कोई तालमेल नहीं था। उससे उपजे रोष से एक प्रधानमंत्री को अपनी जान गंवानी पड़ी।

बोफोर्स तोप खरीद में रिश्वत किसे मिली
प्रोबल दासगुप्ता ने कहा कि बोफोर्स तोप खरीद में 64 करोड़ रुपये की रिश्वत किसे मिली, यह पता आज तक नहीं लग पाया है। सरकार ने इसकी जांच के लिए स्वीडिश अथारिटी को भी नहीं लिखा, जिस कारण घोटाले की सच्चाई बाहर नहीं आ पाई। हालांकि जनरल सुंदरजी हमेशा कहते थे कि बोफोर्स तोप सही थी, लेकिन सौदा गलत था।

दूसरे की लड़ाई में श्रीलंका सेना भेजी
श्रीलंका मामले में उन्होंने कहा कि भारत ने दूसरे की लड़ाई में अपनी सेना भेजी, जिसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को जान गंवानी पड़ी। जिक्र हुआ कि पीएम रहते राजीव गांधी की मुलाकात प्रभाकरण से हुई थी। लौटते समय प्रभाकरण को राजीव गांधी ने बुलेट प्रूफ जैकेट भी दी थी। यह घटना एलटीटीई द्वारा राजीव गांधी की हत्या किए जाने से चार साल पहले की है।

ऑपरेशन ब्रासस्टैक्स 
ऑपरेशन ब्रासस्टैक्स पर दासगुप्ता ने बताया कि पाकिस्तान की सीमाओं पर पांच लाख सैनिकों को तैनात किया था। जनरल सुंदरजी पाकिस्तान की रक्षा क्षमताओं को परखना चाहते थे, लेकिन उन्होंने देश को एक खतरनाक मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया था। 

सतीश गुजराल के जीवन पर चर्चा
अन्य सत्र में अमन नाथ व फिरोज गुजराल ने सतीश गुजराल के जीवन और उनकी विरासत पर अपनी बात रखी। वह पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल के छोटे भाई थे। अन्य सत्र में गार्गी रावत ने श्रेया जानी के साथ उनकी किताब स्लो लिविंग: व्हाट यू कैन डू अबाउट क्लाइमेट चेंज पर चर्चा की। शाइनी एंटनी व सत्यजीत सामंत ने घूल्स एंड गुड रीड्स पर चर्चा की। देवकी पांडे, शोभा श्राफ व डा. जतिंदर परवाज ने ने भी अन्य सत्र में हिस्सा लिया। अखिल गुप्ता के सत्र क्लोजिंग: द हैप्पीनेस लैब में अभिनेत्री पूजा बेदी ने भी चर्चा की।

वक्ताओं ने गंभीर व समसामयिक विषयों पर खुलकर रखी बात
लिटफेस्ट में देशभर से पहुंचे करीब 70 वक्ताओं ने विभिन्न गंभीर व समसामयिक विषयों पर खुलकर बात रखी। लिटफेस्ट का इस वर्ष का थीम 'असहमति की कला : मतभेदों के पार' रहा। वक्ताओं ने लोकतंत्र, वैचारिक स्वतंत्रता, कला, साहित्य और वर्तमान दौर की चुनौतियों पर बेबाक राय रखी। सत्रों के दौरान श्रोताओं व वक्ताओं के बीच सवालों-जवाबों का सिलसिला भी खूब चला, जिसने हर किसी का ध्यान खींचा। कसौली क्लब में लिटफेस्ट के समापन के बाद कसौली स्थित दिवंगत लेखक खुशवंत सिंह के निवास स्थान राज विला में डिनर पार्टी हुई। इसमें देशभर से आए साहित्य प्रेमियों, लेखकों, कलाकारों व आयोजकों ने शिरकत की।

लेखकों ने फिर मिलने का किया वादा
ऐतिहासिक कसौली क्लब में आयोजित तीन दिवसीय खुशवंत सिंह साहित्य उत्सव रविवार को संपन्न हो गया। देश-विदेश से आए नवोन्मेषी लेखकों ने अगले आयोजन में फिर मिलने का वादा किया। उत्सव के आयोजक राहुल सिंह ने नई वेबसाइट भी लॉन्च की। दिन की शुरुआत संदीप सिंह की प्रस्तुति ए मेलोडियस प्रेफेस: डिवाइन स्ट्रिंग्स से हुई, जिसका संचालन निरुपमा दत्त ने किया। फिरोज गुजराल और अमान नाथ ने ए ब्रश विद लाइफ: सतीश गुजराल @100 पर अपने विचार साझा किए। ब्रिगेडियर अरविंद लाल (पद्म श्री) ने कॉरपोरेट योगी: फ्रॉम सीकर टू मुख्य कार्यकारी अधिकारी विषय पर बात की। खुशवंत सिंह साहित्य उत्सव में सतीश गुजराल के शताब्दी समारोह और डॉ. अरविंद लाल व श्रेया जानी जैसे वक्ताओं ने अंतिम दिन कला, साहित्य, उद्यमिता और पर्यावरण जैसे विविध विषयों पर गहन चर्चा की। 

 

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